अब फेसबुक (Facebook) पर आपका फोटो दूसरा कोई अपलोड नहीं कर पाएगा

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Facebook launched Face Recognition Technology

FFacebook launched Face Recognition फेसबुक अब आपकी फोटो की पहचान करके आपको बताने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नॉलॉजी का यूज करेगा. कंपनी पहले भी फेस रिकॉग्निशन यूज करती है, लेकिन अब इसे दूसरे तरीके से किया जाएगा.

फेसबुक ने कहा है, आज हम एक नया ऑप्शनल टूल लॉन्च कर रहे हैं जो लोगों को फेसबुक फेस रिकॉग्निशन के जरिए उनकी पहचान मैनेज करने में मदद करेगा. यह उसी टेक्नॉलॉजी पर काम करता है जो पहले से टैग्ड फोटोज में आपको पहचाने में मदद करती है.

फेसबुक ने कहा है कि लोगों द्वारा दिए गए फीडबैक के आधार पर फेस रिकॉग्निशन लाया जा रहा है और इस टूल को काफी आसान बनाया गया है. यूजर्स इसे चाहें तो ऑन या ऑफ कर सकते हैं.

साधारण शब्दों में फेसबुक के इस बड़े ऐलान के बारे में आपको बताएं. उदाहरण के तौर पर किसी ने आपकी तस्वीर फेसबुक पर अपलोड की है तो फेसबुक आपको एक नोटिफिकेशन भेजेगा. इसमें बताया जाएगा कि किस शख्स ने आपकी तस्वीर अपलोड की है. यहां से आप अगर चाहें तो खुद को इसमें टैग कर सकते हैं या उस शख्स से फोटो हटाने को कह सकते हैं. खास बात ये है कि आपको तब भी नोटिफिकेशन मिलेगा जब कोई यूजर बिना आपको टैग किए हुए आपकी तस्वीर अपलोड करेगा या किसी ग्रुप फोटो में आप हैं.

फेसबुक ने 2010 से फेस रिकॉग्निशन फीचर यूज करना शुरू किया है. इसके जरिए फोटोज के पिक्सल को ऐनालाइज करके टेम्प्लेट जेनेरेट किया जाता है. जैसे ही फेसबुक पर फोटोज और वीडियोज अपलोड होते हैं फेसबुक इसके जेनेरेट किए गए टेंप्लेट के साथ पहचान करता है.

फेसबुक के ये नए फीचर्स दुनिया के ज्यादा देशों में शुरू हो रहे है. हालांकि यह फीचर्स कनाडा और यूरोपियन यूनियन में लागू नहीं होंगे. क्योंकि यहां फेसबुक फेस रिकॉग्निशन टेक्नॉलॉजी नहीं देता है.

प्रोफाइल फोटो सेफ्टी

फेसबुक के मुताबिक कंपनी जल्द ही प्रोफाइल फोटो सेफ्टी के लिए भी फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करेगा. कंपनी ने कहा है, हम चाहते हैं को लोग जब फेसबुक पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करें तो उन्हें इस बात का आत्मविश्वास रहे की उसका गलत इस्तेमाल नहीं हो. इसलिए फेसबुक प्रोफाइल फोटो के लिए भी फेस रिकॉग्निशन टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करेगा.

गौरतलब है कि फेशियल रिकॉग्निशन टेक्लॉलॉजी कई जगहों पर प्राइवेसी को लेकर विवादों में रही है. ऑनलाइन प्राइवेसी के जानकार और इसके लिए लड़ाई करने वाले ऐक्टिविस्ट हमेशा से इस टेक्नॉलॉजी पर संदेह करते आए हैं. उनकी दलील ये होती है कि अगर अरबों लोगों के चेहरे का स्कैन किसी एक जगह यानी किसी एक कंपनी के पास होगा तो इससे सुरक्षा और प्राइवेसी की समस्या हो सकती है.