Save Daughters : happy parent’s day inspiration story || बेटी बचाओ, बेटी पढाओ

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माँ की ममता || बेटी बचाओ, बेटी पढाओ

maa ki mamta

पंद्रह दिन पूर्व ही सुषमा ने आँगन में सब्जी के बीज बोये थे , उसमें अंकुरण हो गया था। नन्हे – नन्हे पौधे देखकर वह मुस्कुराने लगी। अचानक ही उसका हाथ अपने पेट पर गया , लगभग 2 महीने का एक नन्हा ‘अंकुर ‘ उसके भीतर भी है। दो बेटियाँ के बाद जब तीसरी बेटी हुई , तो घर में तो जैसे मातम – सा छा गया। वह बहु से ‘ कुलटा ‘ हो गयी। फिर चौथी बार ! किंतु भाग्य ने फिर धोखा दिया। नतीजा – अल्ट्रासॉउन्ड और चोरी छिपे गर्भपात। और अब पांचवी बार फिर से ‘बेटे की चाहत ‘ उसके मातृव का इंतिहान ले रही थी। सुषमा के मन में कितने विचार उमड़ने लगे – अनचाही संतान को पत्नी पर थोपने का पूरा अधिकार पति को प्राप्त है। इस अधिकार के कारण ही उसे पांचवा अनचाहा भार ढोना पड़ रहा है। मातृव की चाह और अनचाहे मातृव ने अंतर है , इसे क्यों नहीं समझते लोग ? प्रकृति ने कोख नारी को दी है। बच्चे को जन्म से लेकर उसके पालन पोषण की सारी जिम्मेदारी माँ की है। तो फिर उसकी कोख बच्चा कब आये ? वह कितने बच्चो को जन्म दे…. ये फैसला उसका अपना क्यों नहीं होना चाहिए ? गर्भपात के लिए पति की इच्छा ही क्यों आवश्यक हो ?
वह जानती है इस पाँचवे बच्चे का भविष्य भी ‘मशीन ‘ ही तय करेगी। लड़का हुआ तो ठीक , और लड़की हुई तो फिर वही दर्दनाक पीड़ा …..। अपने ही जिस्म के हिस्से को टुकड़ो में कटता हुआ महसूस करना होगा। मौत केवल उस अजन्मी बच्ची ही नहीं , माँ की आत्मा की भी होती है। लेकिन , अब और नहीं।
सुषमा ने खुद को मजबूत किया और एक चट्टान की तरह पति के समक्ष खड़ी होकर बढ़ी कठोरता से उसने अपना निर्णय सुना दिया , ‘इस बच्चे को मैं जन्म दूंगी , चाहे वह कोई भी हो। सुना आपने , क्योंकि कोख पर सिर्फ मेरा और सिर्फ मेरा ही अधिकार है।‘

बेटी है वरदान, इसका करो सम्मान

“बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” योजना को एक राष्ट्रीय अभियान के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा | सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से उन 100 जिलों का चयन किया जाएगा जहाँ बाल लिंग अनुपात सबसे कम है और फिर वहां विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित कर कार्य किया जाएगा | यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संयुक्त पहल है । इसका मुख्य उद्देश्य है कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, बालिकाओं के अस्तित्व को बचाना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा बालिकाओं की शिक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना | यह योजना न केवल लड़कियों बल्कि पूरे समाज के लिए एक वरदान साबित हो सकती है । इतना ही नहीं, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” ( Beti Bachao essay in Hindi ) योजना ऐसे वक्त आई है जब देश महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं जैसे- दुष्कर्म और अन्य तरह के हमलों का सामना कर रहा है | इसलिए इस योजना का महत्व और भी बढ़ जाता है |

“बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” ( Beti Bachao essay in Hindi ) सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि देश के हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है । यदि एक समाज के रूप में हम इस समस्या के प्रति संवेदनशील नहीं होंगे, जागरूक नहीं होंगे, तो हम अपनी ही नहीं, आने वाली पीढ़ी के लिए भी एक भयंकर संकट को निमंत्रण देंगे | इसलिए यह आवश्यक है कि एक नागरिक के रूप में हम सचेत रहे | कहीं पर भी कन्या भ्रूण हत्या हो रही हो तो तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दें | लोगों को इस बारे में सजग करे | हमारा समाज अबोध बालिकाओं की हत्या का पाप और नहीं झेल सकता|